जिस मार्ग को अपनाएंगे, वैसी ही मंजिल मिलेगी रामगिरी महाराज
जिस मार्ग को अपनाएंगे, वैसी ही मंजिल मिलेगी ,,,,,,,रामगिरी महाराज
पंडित पवन भारद्वाज //दिव्यांग जगत
मुण्डावर समीपवर्ती नालपुर स्थित पहाड़ी शिव मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम में मंदिर के महंत रामगिरी महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि बिना मंजिल के मार्ग नहीं होता, बिना मंजिल के मंजिल नहीं मिलती । मंजिल है तो मार्ग है , मार्ग है तो मंजिल है । जितने जीव हैं उतनी मंजिल है । सब की अपनी अपनी मंजिल है , अपने-अपने मार्ग है । जिस प्रकार के मार्ग को अपनाएंगे वैसी मंजिल और मंजिल के अनुसार मार्ग मिलता है । मंजिल को सामने रखकर चलने से सही मार्ग मिलता हैं । नालपुर मंदिर के महंत रामगिरी महाराज ने शुक्रवार को मंदिर परिसर में प्रवचन दे रहे थे । उन्होंने कहा कि हम प्रतिदिन मंदिर जाते हैं भगवान के दर्शन करते जिस मार्ग पर चलकर मंजिल प्राप्त करते है उस मार्ग को समझकर हम भी उस पर चलें और उन्हीं के अनुसार मंजिल को प्राप्त कर सकें । मार्ग दो प्रकार के हैं एक सन्मार्ग और दूसरा उन्मार्ग । एक संसार मार्ग दूसरा मोक्ष मार्ग । जो उन उन्मार्ग से चलेगा वह मोक्ष की प्राप्ति नहीं कर सकता जो सन्मार्ग से चलेगा वह स्वर्ग मोक्ष को प्राप्त करेगा, वह संसार में नहीं रह पाएगा । आज हम जिस मार्ग पर चल रहे हैं और जिसे मंजिल समझ रहे हैं वह धन-संपत्ति ,मकान , दुकान, घर परिवार सोना चांदी आदि को मंजिल मान रहे हैं । ऐसा
करके हमने तो अपना मार्ग अवरुद्ध कर लिया है । इसे ही मंजिल मानने से एक दिन जीवन में अंधकार छा जाएगा और जीवन का उत्साह ही समाप्त हो जाएगा ।


