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राजस्थान सरकार ने ओ.पी.एस. बहाल कर जो वाहवाही लूटी थी वह वर्तमान तबादला उद्योग से उपजे आक्रोश में बट्टे खाते में जा रही हैं -शिक्षक नेता जगदीश ढाका

राजस्थान सरकार ने ओ.पी.एस. बहाल कर जो वाहवाही लूटी थी वह वर्तमान तबादला उद्योग से उपजे आक्रोश में बट्टे खाते में जा रही हैं -शिक्षक नेता जगदीश ढाका
–नियामत जमाला–
भादरा, 31 अगस्त /राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील ) के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व शिक्षक नेता जगदीश ढाका का कहना है कि राजस्थान की वर्तमान कांग्रेस सरकार ने कर्मचारियों की ओ.पी.एस. बहाल करने की घोषणा कर कर्मचारियों से जो वाहवाही लूटी थी वह वर्तमान में तबादला उद्योग के कारण उपजे आक्रोश की वजह से बट्टे खाते में जा रही हैं। शिक्षक नेता ढाका के अनुसार गत विधानसभा चुनाव के समय शिक्षक संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा दिए मांग पत्र पर कांग्रेस द्वारा घोषणा पत्र तैयार करते हुए दो मांगे शामिल कर आश्वासन दिया था, उसे वर्तमान सरकार ने गठन के बाद घोषणा पत्र को जन घोषणा के रूप में स्वीकार भी किया कि शिक्षकों की शीघ्र तबादला नीति बनाकर ऑनलाइन से आवेदन लेकर तबादले किए जाएंगे व एकीकरण के नाम पर बन्द किए गए सभी स्कूलों को खोला जाएगा किंतु दुर्भाग्य यह रहा कि हर वर्ष तबादला नीति बनाकर तबादले करने की घोषणा की जाती रही , परंतु राज्य सरकार द्वारा तबादला नीति के स्थान पर डिजायर राज के नाम पर तबादला उद्योग जारी रखा गया तथा मनमाने ढंग से तबादले किए जाते रहे। इन तबादलों में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। ढाका के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिक्षक सम्मान समारोह में तत्कालीन शिक्षमंत्री डोटासरा की उपस्थिति में शिक्षकों से तबादलों के एवज में रुपये लेने की बात पूछी कि क्या आपके तबादलों में रुपये लगे हैं।तब शिक्षकों ने एक स्वर में स्वीकार कर कहा कि रूपये लगे हैं, फिर दोबारा मुख्यमंत्री ने पूछा कि रूपये लगे हैं , फिर शिक्षकों ने एक स्वर में स्वीकार किया कि रूपये लगे हैं। उस समय सरकार की जबर्दस्त किरकरी हुई,परन्तु राज्य सरकार ने नीति में कोई सुधार नहीं किया। इस प्रकार राज्य सरकार ने शिक्षक व कर्मचारियों का राजनीतिकरण कर उनमें भय, भ्रष्टाचार, दहशत व आतंक का माहौल निरन्तर पैदा किया हैं जो आज तक जारी है।जिससे राष्ट्र निर्माता कहे जाने वाले शिक्षकों के स्वाभिमान पर निरन्तर चोट की जाती रही हैं जो आक्रोश उपजने का कारण बनता गया। शिक्षक नेता ढाका के अनुसार पूर्व भाजपा सरकार द्वारा एकीकरण के नाम पर जो स्कूल बन्द किए थे, वर्तमान सरकार ने उनमें कुछ ही स्कूल खोलकर भी शिक्षक संगठनों के साथ वायदा खिलाफी की हैं। परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने कर्मचारियों की ओ. पी .एस. बहाल कर जो वाह वाही लूटी थी, वह तबादला उद्योग के कारण उपजे आक्रोश की वजह से बट्टे खाते में जा रही है। ढाका का मानना हैं कि राज्य सरकार समय रहते प्रशासन में हो रही खामियों की आत्मलोचना करे, तथा विधायकों को डिजायर के नाम पर जो अकूत अधिकार दिए हैं,जिससे आम जन में मनमानीकरण व तानाशाही करने का संदेश जा रहा और यह जांच का विषय बनता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षक हितों के लिए संघर्षरत शिक्षक नेता ढाका का कहना हैं कि इस गम्भीर विषय पर राज्य सरकार को समय रहते संज्ञान लेना चाहिए अन्यथा वह निकट भविष्य में इसका खामियाजा भुगतने के लिए भी तैयार रहे।
फोटो- फाइल फाइल शिक्षक नेता जगदीश ढाका

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