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गर्व होगा आपको इस दिव्यांग महिला पर,रच दिया इतिहास

दिव्यांग महिला ने एक हाथ से पूरी की 1,229 फीट, 9 इंच की चढ़ाई, वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कर रचा इतिहास

दिव्यांग जगत

जयपुर। कुछ लोग अपनी कमज़ोरी को अपने रास्ते का रोड़ा नहीं बनने देते. भगवान की दी हुई कमी को बदल तो नहीं सकते लेकिन अपने कर्मों के बल पर अपना भाग्य बदलने की हिम्मत और जज़्बा कम ही लोगों में होता हैं. ऐसे ही लोगों में से एक हैं वो महिला जिसके अपनी कमज़ोरी को अपनी ताकत बनाया और ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसे दुनिया जानेगी.लंदन में अनुशे हुसैन नाम की महिला ने द कैसल क्लाइंबिंग सेंटर में नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया. हैरानी की बात तो ये है कि अनुशे का दाहिना हाथ पूरा नहीं है. सिर्फ कोहनी तक ही है. फिर भी उन्होंने एक हाथ से 1,229 फीट, 9 इंच की चढ़ाई न सिर्फ पूरी की बल्कि एक हाथ से ऐसा कारनामा करने वाली पहली महिला बनकर विश्व रिकॉर्ड धारक भी बन गई. और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा.

एक हाथ से चढ़ गई पहाड़ जैसी दीवार, बनाया विश्व रिकॉर्ड

अनुशे हुसैन का पालन-पोषण लक्ज़मबर्ग में हुआ और अब वो लंदन में रहती हैं, अनुशे का दाहिना हाथ जन्म से ही कोहनी तक ही है. उनके लिए चढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती थी अपने सीधे हाथ के इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करना, जो आसान नहीं था. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से बातचीत में अनुशे ने बताया कि कैसे उनकी ट्रेनिंग हुई जब उन्हें केवल अपने बाएं हाथ का इस्तेमाल करना था. एक हाथ से ही पूरी चढ़ाई को बैलेंस करना और सफलता के साथ इसे कर ले जाना बड़ी चुनौती थी जिस उन्होंने पार कर लिया. पैराक्लाइम्बिंग लंदन ग्रुप की सह-संस्थापक हुसैन ने कहा कि उन्होंने कैंसर से उबरने और एहलर्स-डानलोस सिंड्रोम के पुराने दर्द से निपटने के दौरान करीब 10 साल पहले एक खेल के रूप में चढ़ाई शुरू की थी जो पैशन बन गया और अब वो विश्व रिकॉर्ड धारक बन गई.

विकलांग इंसान से अलग एक पहचान मिलने से खुश हैं अनुशे

अनुशे हुसैन ने एक घंटे में एक हाथ से चढ़ाई की दीवार पर चढ़ने वाली सबसे बड़ी ऊर्ध्वाधर दूरी का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जब उसने कुल 1,229 फीट और 9 इंच की दूरी सफलता के साथ पूरी की. अपना सबसे अच्छा अनुभव साझ करते हुए अनुशे ने बताया कि क्लाइंबिंग की सबसे अच्छी बात ये रही की उस दौरान वो एक सामान्य इंसान थी. क्लाइंबर थी. जबकि सालों से वो एक दिव्यांग की पहचान के साथ ही जी रही थी. जिससे लड़ना और बाहर आना बहुत मुश्किल था.

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