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बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण रामबास में छह दिन से चल रही शिव पुराण महा कथा का हवन एवं भंडारे के साथ आज संपन्न।

दिव्यांग जगत संवादाता राजगढ़ चूरू से प्रो. राजपाल गोस्वामी बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण रामबास में छह दिन से चल रही शिव पुराण महा कथा का हवन एवं भंडारे के साथ आज संपन्न। सादुलपुर में शिव पुराण कथा वाचन संगीत मय महन्त रामानंद गिरी जी महाराज द्वारा 8 मई से 14 मई तक आयोजित कि गई, प्रथम दिन शोभायात्रा के साथ शिव पुराण कथा शुरू,मय महन्त रामानंद गिरी जी महाराज ने शिव महापुराण कथा मे ज्योतिलिंग उत्पत्ति का प्रसंग, उन्होंने बताया कि भगवान शिव की शक्ति के अनेक रूप हैं, पार्वती प्रकटेव दिवस में महन्त रामानंद गिरी जी महाराज बताया वास्तव में सनातन संस्कृति में मातृ शक्ति को उचित सम्मान हमेशा दिया है, जहां मातृ शक्ति का सम्मान नहीं होता,वो समाज कभी आगे नहीं बढ़ सकता। इस लिए हमें समाज में मातृ शक्ति को उचित सम्मान देना चाहिए, नारी शक्ति स्वरूपा मां, बहिन, पत्नी,, बेटी हर रूप में समाज की दशा और दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और सम्मान प्राप्त करने कि अधिकारी है इसलिए हमें घरों में बच्चों के जन्म से ही नारी शक्ति का सम्मान करने, शिक्षा प्रसार राष्ट्र निर्माण कार्य करने हेतु, पर्यावरण करने हेतु वृक्ष लगाने का संकल्प के साथ प्राणियों की सुरक्षा की संस्कार विकसित किया जाना चाहिए। राष्ट्रहित को स्व हित से ऊपर मानना चाहिए।शिवमहापुराण कथा के पांचवें दिन महंत रामानन्द गिरि महाराज ने बताया कि शंकर पार्वतीजी का विवाह महाशिवरात्रि के दिन नही हुआ था । विवाह के दिन ही भगवान शंकर जी ने कामदेव को जीवनदान भी दिये थे। विधि की लेखनी भी भगवान शंकर जी मेट देते हैं इसीलिए श्रद्धा पूर्वक भक्ति और अपना कर्म करते रहना चाहिए। भक्ति और कर्म का फल सुनिश्चित मिलता ही है। भाग्य में ना हो तो किसी से मांगा हुआ धन भी जीवन मे फलता नही है इसीलिए विवाह करते समय कन्या के पिता से धन प्राप्ति की आशा नही करना चाहिए। इस कुप्रथा ने प्रत्येक माता पिता को चिंता मे डाल दिया है। आज जिस पीढी के विवाह हो रहे हैं उनकी भी कन्याएँ होगी तब वे भी इसी दहेजप्रथा से परेशान होंगे। यदि वर्तमान पीढी के युवा चाहते हैं कि उनकी कन्या के विवाह के समय दहेज न मांगा जाये तो आज ही संकल्प इसे बंद करने का संकल्प लें। छठे दिन शिव महा पुराण कथा में गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के मंत्री इन्दु कुमार गोस्वामी, शिव स्वामी, रामनिवास ढोलक मास्टर, मनोज सरसर और माताओं और बहनों ने शिव भजनों पर झूमने लगे। महन्त रामानन्द गिरि जी महाराज ने डॉक्टर बाबूलाल स्वामी रामदेव मंदिर पुजारी, गिरधारी लाल सराड़ा, डॉक्टर सत्यनारायण सांडिल्य, लोकगायिका मनीषा शांडिल्य आदि को दुपट्टा ओढ़ा कर सम्मानित किया।हवन भण्डारे के साथ शिवमहापुराण कथा का समापन
शिवमहापुराण कथा के सप्तम दिन महंत रामानन्द गिरि महाराज ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों की कथा सुनाये। महाराज जी ने बताया कि मनुष्य खाली हाथ आता है खाली हाथ जाता है किंतु जो मनुष्य शिवमहापुराण की कथा श्रवण का पूण्यफल साथ लेकर जाता है उस प्राणी को यमराज के दूत हाथ भी लगा नही पाते। उस प्राणी को शिवजी के गण परमात्मा सदाशिव के सानिध्य में लेकर जाते हैं जहाँ सर्वत्र सुख और आनंद ही आनंद मिलता है। तुलसी बिल्वपत्र आंवला आदि के गुणों का वर्णन करते हुए महाराज जी बताया कि यह पत्र सिर्फ पूजन के ही काम नही आते बल्कि इनके सेवन का भी विधान ग्रंथों में है यह औषधियों के रूप मे भी उपयोगी है मनुष्य को निरोगी बनाये रखते हैं। सनातन पैथी मे मुख्य उपयोगी है। जब से सृष्टि की उत्पत्ति हुई है तब ही से सनातन पैथी से अपने रोगों का इलाज हिन्दू करते थे।
यज्ञ भागवत शिवमहापुराण कथाआयोजन से ही धर्म का प्रचार होता रहता है। हिन्दुओं मे धर्म के प्रति जागरूकता रहती है। धर्म कार्यों से हिन्दू युवा जुड़े और उनमें धर्म के प्रति लगाव बना रहे इसके लिए कार्य करने वाली राष्ट्रीय धर्म प्रचार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामानन्द गिरि जी ने राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष इन्दुगिरि गोस्वामी जी को बनाये जाने की घोषणा महाराज जी ने किया।शिव पुराण महा कथा रामदेव मंदिर समिति, गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति, महिला मण्डल, गो सेवा दलिया समिति अन्य संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कि गई।

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