DESH KI AAWAJ

पुरानी पैंशन बहाली को आर्थिक भार बताना दुर्भाग्यपूर्ण -एनएमओपीएस प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र बेनीवाल

पुरानी पैंशन बहाली को आर्थिक भार बताना दुर्भाग्यपूर्ण -एनएमओपीएस प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र बेनीवाल
नियामतजमाला_
भादरा, 19 अप्रैल /भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के आर्थिक सलाहाकर सौम्य कांति घोष द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट में पुरानी पैंशन बहाली को देश के लिए आर्थिक भार बताने की बात का एन.एम. ओ.पी. एस.राजस्थान ने पूर्णतः खण्डन किया हैं। एन.एम.ओ. पी.एस. राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र बेनीवाल ने बताया हैं कि सौम्य कांति घोष द्वारा इस प्रकार की रिपोर्ट जारी करना राजनैतिक प्रेरित व दुर्भाग्यपूर्ण है।बेनीवाल ने बताया कि रिपोर्ट का ये हिस्सा तथ्यहीन और सरकारी दबाव में उछाला गया शगूफा मात्र है।जनवरी 2004 से देशभर में लागू हुई एन. पी.एस. योजना की औसतन मेच्योरिटी 2033 के बाद होगी और तभी कर्मचारियों को पैंशन देनी होगी उससे पहले आर्थिक भार का विषय छेड़ना एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।एन. पी. एस. की टोटल कटौतियां जिन तीन निजी कंम्पनियों में जमा की जा रही है उनमें से एक एस. बी. आई.खुद हैं।इससे आम जन अंदाजा लगा सकता है कि एस.बी. आई. के आर्थिक सलाहकार द्वारा इस प्रकार की रिपोर्ट देने के पीछे असली मंशा क्या है। बेनीवाल ने आगे बताया कि कुछ एक अपवादों को छोड़कर 2004 का कर्मचारी 2034-35 से पहले सेवानिवृत ही नहींं होगा तो पैंशन का भार कैसे होगा।नाममात्र के लोग ही 2034 से पहले सेवानिवृत होंगे। तब तक उल्टा एन.पी.एस. में सरकारी अंशादन जो निवेश किया जा रहा है वो बचेगा इसलिए पुरानी पैंशन योजना बहाल करना आर्थिक रूप से सरकार के लिए फायदेमंद है न कि नुक्सानदायक हैं। उन्होंने कहा ये इस प्रकार की रिपोर्ट देश में कर्मचारियों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए जारी की जाती है ताकि कर्मचारी को मिल रही सुविधाओं पर केंची चलाई जा सके।देश की जानी मानी वित्तीय संस्था को इस प्रकार के मुद्दे पर बिना तथ्य बयानबाजी से बचना चाहिए। उनके अनुसार समय की मांग है कि तमाम राजनैतिक दलों को भी केवल विरोध के लिए विरोध करने की परिपाटी से उपर उठकर निष्पक्ष होकर सोचना चाहिए।

admin
Author: admin