राजस्थान में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों का बड़ा गड़बड़झाला
कृषि पर्यवेक्षक भर्ती-2021; फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट लगा ली नियुक्तियां
काउंसलिंग में मेडिकल टीम तक नहीं बैठी, फिर भी दे दी फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों वालों को नियुक्ति
कृषि पर्यवेक्षक भर्ती-2021; दिव्यांग सर्टिफिकेट्स मे बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ उजागर
सुखराम मीणा/दिव्यांग जगत
40 फीसदी दिव्यांग होना जरूरी, लेकिन 30% पर भी कर दिया चयन
रीट के बाद अब कृषि पर्यवेक्षक भर्ती मे धांधली
भर्ती-2021 में भी फर्जी दस्तावेज लगा आरक्षित पदों पर नियुक्ति लेने का सामने आया है।
2389 पदों के लिए निकली भर्ती में सभी को नियुक्ति भी दे दी है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि अभ्यर्थियों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर विशेष योग्यजन यानी क्षैतिज आरक्षण का लाभ लिया है। इसे मिलीभगत या लापरवाही कहें कि चयन प्रक्रिया में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय मेडिकल टीम भी नहीं बैठी। जिसकेे चलते अभ्यर्थियों के दिव्यांग सर्टिफिकेट की जांच भी नहीं हो सकी। मिलीभगत का संदेह इसलिए क्याेंकि, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की विज्ञप्ति में लिखा है कि 40 प्रतिशत या उससे अधिक विशेष योग्यजन को भर्ती में आरक्षण का लाभ मिलेगा,

लेकिन झालावाड़ के रामदयाल पुत्र मोतीलाल को 30 प्रतिशत वाले अभ्यर्थी का भी सलेक्शन कर दिया है। इसके अलावा स्थाई प्रमाण पत्र वाले ही इस आरक्षण का पात्र माना गए हैं, लेकिन भर्ती को देखते हुए अभ्यर्थियों ने अस्थाई दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर क्षैतिज आरक्षण का लाभ ले लिया। हर जिले में इस तरह अभ्यर्थियों ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाया है। बांसवाड़ा में भी इसको लेकर शिकायत हुई है कि यहां के भी कई अभ्यर्थियों ने इसी तरह फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बना लाभ लिया है। विभाग की ओर से निकाली गई भर्ती में विशेष योग्यजन के लिए 87 पद आरक्षित थे, उसके लिए प्रदेशभर में 12 हजार से भी ज्यादा आवेदन आए।
जयपुर, पाली, भीलवाड़ा, झालावाड़ में फर्जीवाड़े के सबूत
अस्थाई दिव्यांग प्रमाण पत्र दिया तो भी दे दी नियुक्ति
पाली जिले के चेतन लखारा पुत्र गोतम लखारा ने आंखाें से कम दिखाई देने का अस्थाई प्रमाण पत्र लगाया है। इस यह सर्टिफिकेट 15 फरवरी 2021 बनाया था। जिसकी वैधता 2024 तक है, लेकिन भर्ती के नियमों के मुताबिक दिव्यांग का स्थाई प्रमाण पत्र होना चाहिए। चेतन ने ज्वॉइन भी कर लिया है।
नया देना था, पर 2019 के सर्टिफिकेट पर दी नियुक्ति
भीलवाड़ा के सुनिल पिता खजोड़लाल ने भी अस्थाई दिव्यांग सर्टिफिकेट लगाकर नियुक्ति पा ली है। जिसका सर्टिफिकेट 25 अक्टूबर 2019 बना था। केवल स्थाई सर्टिफिकेट ही मान्य होता है, लेकिन सुनिल प्रमाण पत्र की वैधता सन 2022 तक है फिर भी इनका सलेक्शन हो गया।
48% दिव्यांग का सर्टिफिकेट था, बता दिया 70 प्रतिशत
जयपुर के सुनील कुमार यादव ने दिव्यांग प्रमाण पत्र में दोनों आंखों का 70% विशेष योग्यजन बताया है, लेकिन जब ऑनलाइन जांच की तो सामने आया कि एक आंख 48% ही खराब है। जो सर्टिफिकेट 2018 में बनाया था। भर्ती के लिए 28 मार्च 2022 को नया बनवाया,, उसमें दोनों आंखें खराब बता दी।
इतना बड़ा फर्जीवाड़ा, राजकीय आदेशों की सारेआम उड़ाई धज्जियाँ:
30% दिव्यांग के प्रमाण पत्र पर भी आरक्षण में दी नियुक्ति
झालावाड़ के रामदयाल पिता मोतीलाल ने भी 30% विशेष योग्यजन का सर्टिफिकेट लगाया था, जिनको भी क्षैतिज का आरक्षण का लाभ दे दिया गया, जबकि नियमानुसार 40% या उससे अधिक दिव्यांग को ही आरक्षण मिलता है। फिर भी फर्जी तरीके से लाभ दिया गया है, अब नियुक्ति भी हो गई है।
स्थाई व अस्थाई दो तरह से बनते हैं दिव्यांग प्रमाण पत्र, पर नियुक्ति के लिए स्थाई जरूरी
दिव्यांग सर्टिफिकेट दो प्रकार के बनते हैं। स्थाई और अस्थाई ये है इन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया
{स्थाई प्रमाण पत्र यानी इस तरह के व्यक्ति की दिव्यांगता में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं होती है। जिसे विशेषज्ञ टीम बनाती है।
{अस्थाई प्रमाण पत्र में व्यक्ति की दिव्यांगता में सुधार हो सकता है। इसलिए अस्थाई बनाते हैं। जिस पर आरक्षण नहीं मिलता है।
समझें कैसे बनता है स्थाई दिव्यांग प्रमाण पत्र-
दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने के लिए अभ्यर्थी को सबसे पहले ऑनलाइन फॉर्म भरना पड़ता है। उसके बाद सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम का गठन होता है, जो उसकी जांच कर रिपोर्ट तैयार करती है। अस्पताल के पीएमओ या सीएमएचओ के वेरिफिकेशन करने के बाद सर्टिफिकेट जारी करते हैं।
IAS कानाराम, आयुक्त, कृषि विभाग का कहना है की
“वही मेरे अभी ऑर्डर इस विभाग के लिए हुए हैं। अभी तक ज्वॉइन भी नहीं किया है। अभी मैं इस बारे में कुछ नहीं बता सकता। ज्वॉइन के बाद ही इसको देखूंगा”।

