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ईशर (भगवान शिव) एवं गणगौर (माता पार्वती) की पूजा का प्रतीक है यह त्यौहार – केजी कौशिक

ईशर (भगवान शिव) एवं गणगौर (माता पार्वती) की पूजा का प्रतीक है यह त्यौहार – केजी कौशिक

【दिव्यांग जगत 】

पंडित पवन भारद्वाज】
बानसूर विधानसभा क्षेत्र के बामनवास पंचायत में गणगौर माता मंदिर स्थल पर मेले का आयोजन हुआ। जिसमे मुख्य अतिथि राजस्थान भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के सदस्य कृष्ण गोपाल कौशिक एवं विशिष्ठ अतिथि रुकमणी कौशिक प्रदेश सचिव राजस्थान महिला कांग्रेस, अध्यक्षता बबीता कंवर शेखावत सरपंच बामनवास रहे।

मुख्य अतिथि कृष्ण गोपाल कौशिक ने कहा कि गणगौर पर्व मुख्य रूप से एक वैवाहिक परंपरा पर आधारित रस्म है, मान्यता अनुसार माता गवरजा होली के दूसरे दिन अपने पीहर आती हैं तथा आठ दिनों के बाद ईसर (भगवान शिव) उन्हें वापस लेने के लिए आते हैं। विदाई के दिन को ही गणगौर कहा जाता है। तथा उसी उपलक्ष्य में गणगौर का त्यौहार मनाया जाता है, लड़कियां सर्वगुण संपन्न वर प्राप्त हो इसलिए ईसर एवं गणगौर की पूजा करती हैं तथा नवविवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु प्राप्त हो इसलिए ईशर (भगवान शिव) व गणगौर(माता पार्वती) की पूजा 16 दिवस तक करती है। इस दौरान कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया जिसमे कामडा विकाश पहलवान टोडियावास ने जीता। मेले में आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने भरपूर आनंद लिया। मेला कमेटी अध्यक्ष शेरसिंह शेखावत, लालाराम एडवोकेट, राकेश, महेंद्र सैनी, अभिषेक शर्मा, गजेंद्र सैनी, जोगेंद्र चौहान, नरेश, रामकरण, रणधीर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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