जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में जटिल बाइल डक्ट इंजरी की दूरबीन से सफल सर्जरी
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जेएलएन) अजमेर के सर्जरी विभाग ने जटिल बाइल डक्ट इंजरी (पित्त की नली में चोट) के उपचार में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रोफेसर एवं यूनिट हेड डॉ. अनिल के. शर्मा के नेतृत्व में टीम ने पूर्व में गॉलब्लेडर सर्जरी के बाद पित्त की नली में गंभीर चोट, रिसाव, पीलिया और असामान्य जुड़ाव जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों की सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की।
इनमें E2 और E3 प्रकार की बाइल डक्ट इंजरी का दूरबीन से ऑपरेशन राजस्थान के मेडिकल कॉलेज में पहली बार किए जाने का दावा किया गया है। पुराने ऑपरेशनों के कारण पेट के अंदर अत्यधिक चिपकाव होने से सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी।
एक 39 वर्षीय किशनगढ़ निवासी महिला को तीन महीने से पीलिया और तेज खुजली की समस्या थी। पूर्व गॉलब्लेडर ऑपरेशन के दौरान पित्त की नली में गंभीर चोट लगी थी। जेएलएन में टीम ने चिपके अंगों को अलग कर असामान्य जोड़ को हटाया और Laparoscopic Roux-en-Y Hepaticojejunostomy कर नया रास्ता बनाया। मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुकी हैं।
वहीं भीलवाड़ा निवासी 55 वर्षीय सीता देवी में गॉलब्लेडर सर्जरी के बाद पित्त की नली पूरी तरह कट गई थी और आंत व पित्त की नली के बीच असामान्य रास्ता बन गया था। 29 नवंबर 2025 को जेएलएन की टीम ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर चिपकाव हटाए, असामान्य रास्ता बंद किया और नया बाइल ड्रेनेज मार्ग बनाया।
इसके अलावा 23 वर्षीय अजमेर निवासी महिला में पूर्व सर्जरी के दौरान लगी क्लिप पित्त की नली के पास फंसने से Type-D इंजरी और बाइल लीक की समस्या सामने आई। टीम ने दूरबीन से क्लिप निकालकर ड्रेनेज की व्यवस्था की। रूपनगढ़ निवासी 40 वर्षीय मरीज में गॉलब्लेडर ऑपरेशन के दौरान Type-E बाइल डक्ट इंजरी सामने आई, जिसमें पित्त की नली पूरी तरह कट गई थी। दोनों मरीज फिलहाल उपचाराधीन हैं।
सर्जिकल टीम में डॉ. अनिल के. शर्मा के साथ डॉ. नवीन जांगड़ा, डॉ. रशमी सिंह सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम और अस्पताल स्टाफ ने भी उपचार में सहयोग किया।
डॉ. शर्मा ने बताया कि बार-बार ऑपरेशन होने से पेट के अंदर अंगों में चिपकाव हो जाता है, जिससे ऐसी सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि गॉलब्लेडर ऑपरेशन के बाद पीलिया, गहरे रंग का पेशाब, लगातार पेट दर्द, बुखार, उल्टी या लंबे समय तक खुजली जैसे लक्षण हों तो मरीज को इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।


