दुर्लभ AB पाजिटिव SDP रक्तदान से बची महिला की जान, केकड़ी के रक्तवीर दशरथ साहू ने जयपुर पहुंच कर किया रक्तदान
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर। जयपुर स्थित स्टेट कैंसर हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट के वार्ड में भर्ती 42 वर्षीय महिला मरीज सुनीता देवी के लिए उस समय जीवन और मृत्यु का प्रश्न खड़ा हो गया, जब गंभीर बीमारी के चलते उनका हीमोग्लोबिन अत्यंत कम हो गया। चिकित्सकों ने मामले को अत्यंत दुर्लभ बताते हुए AB पॉजिटिव SDP (सिंगल डोनर प्लेटलेट) की तत्काल आवश्यकता जताई।
हॉस्पिटल के उक्त मरीज का इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ. शांतनु शर्मा के अनुसार, मरीज की स्थिति गंभीर थी और SDP ग्रुप का रक्त अत्यंत दुर्लभ होने के कारण समय पर उपलब्ध होना चुनौतीपूर्ण था। परिजनों द्वारा जयपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में काफी प्रयास किए गए, लेकिन उपयुक्त रक्तदाता नहीं मिल पाया।
इसके बाद परिजनों ने केकड़ी क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक एवं रक्तदान समूहों में रक्त की आवश्यकता की सूचना प्रसारित की। यह जानकारी रक्तदान क्षेत्र में सक्रिय देने वाले समाजसेवी दिनेश वैष्णव तक पहुंची, जिन्होंने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जयपुर और केकड़ी स्तर पर संपर्क शुरू किया।लगातार प्रयासों के बाद कही से भी कोई डोनर नहीं मिले पर केकड़ी के पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक एवं जाने-माने समाजसेवी रक्तवीर दशरथ साहू से संपर्क किया गया। सूचना मिलते ही दशरथ साहू ने बिना किसी विलंब के AB पॉजिटिव SDP रक्तदान के लिए सहमति दी और स्वयं के स्तर पर सुरक्षा एवं सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए स्थानीय शिक्षक राजेंद्र साहू के साथ केकड़ी से जयपुर एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचे।
दशरथ साहू ने 2 से 3 घंटे तक अस्पताल में एडमिट रहकर SDP रक्तदान किया, जिससे महिला मरीज सुनीता देवी के उपचार में मदद मिली और समय रहते उसकी जान बचाई जा सकी।
उल्लेखनीय है कि दशरथ साहू अपने जीवन काल में अब तक 37 बार रक्तदान कर चुके हैं और यह उनका पहला SDP रक्तदान था। वे वर्तमान में गजक–तिलपट्टी निर्माता उद्योग से जुड़े व्यवसायी हैं, इसके बावजूद अपने व्यस्त समय की परवाह किए बिना मानव सेवा के लिए तत्पर रहे। दशरथ साहू, वर्तमान भाजपा वार्ड पार्षद मुन्नी देवी साहू के सुपुत्र हैं तथा सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सदैव अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। मरीज के परिजनों ने दशरथ साहू को देवदूत बताते हुए हृदय से आभार व्यक्त किया। वहीं एसएमएस ब्लड बैंक के स्टाफ ने भी उन्हें “जीवनदाता” बताते हुए समय पर पहुंचकर दुर्लभ रक्तदान करने के लिए मुक्तकंठ से प्रशंसा की। यह घटना न केवल मानवता और सेवा भावना की मिसाल है, बल्कि समाज को रक्तदान के प्रति जागरूक करने वाला प्रेरणास्पद संदेश भी देती है।


