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मालपुए ने रचा इतिहास, पुष्कर के गिरिराज वैष्णव को केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय सम्मान से किया सम्मानित

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर । तीर्थनगरी पुष्कर के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। लक्ष्मी मिष्ठान भंडार के संचालक गिरिराज वैष्णव को नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में दैनिक भास्कर इंडिया प्राइड अवार्ड 2025 (सीजन–5) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें केंद्रीय केबिनेट मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदान किया। इस अवसर पर मोहित वैष्णव भी उनके साथ मंच पर मौजूद रहे।

पुष्कर के इतिहास में पहली बार मिठाई व्यवसाय को मिला राष्ट्रीय सम्मान

शहर के इतिहास में पहली बार किसी मिठाई व्यवसायी को केबिनेट मंत्री के हाथों राष्ट्रीय स्तर का सम्मान हासिल हुआ है। इस उपलब्धि ने न केवल गिरिराज वैष्णव, बल्कि पूरे पुष्कर का मान बढ़ा दिया है।

दादा की सौगात बनी पुष्कर की पहचान

दशकों पहले गिरिराज वैष्णव के दादा जी ने मालपुए को पुष्कर की अलग पहचान दिलाई। देशी घी में तले, गाढ़े दूध में डूबे उनके मालपुए ने तीर्थनगरी के स्वाद को नया रूप दिया और आज मालपुआ पुष्कर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

आज पूरे देश–विदेश में ‘मालपुआ फाउंडर’ के नाम से पहचान

गिरिराज वैष्णव की पहचान अब सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है। पूरे देश में लोग उन्हें “मालपुआ फाउंडर” के रूप में जानते हैं।
सोशल मीडिया, राष्ट्रीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया—सभी के लिए लक्ष्मी मिष्ठान भंडार अब पुष्कर का प्रमुख डेस्टिनेशन पॉइंट बन चुका है। देश भर के फूड ब्लॉगर्स, रिपोर्टर्स, यूट्यूबर्स और विदेशी मीडिया टीमें जब भी पुष्कर आती हैं, उनका पहला पड़ाव यही दुकान होती है।
यहाँ आने वाला हर पर्यटक, श्रद्धालु और विदेशी सैलानी गिरिराज के मालपुए का स्वाद लिए बिना वापस नहीं लौटता। इसी वजह से यह दुकान आज पुष्कर की खाद्य संस्कृति का प्रतीक बन चुकी है।

विरासत को आधुनिक रूप देकर पहुँचाया विश्व तक

गिरिराज वैष्णव ने दादा की परंपरा को आधुनिक स्वरूप दिया और मालपुए की प्रसिद्धि को देश–विदेश तक पहुँचा दिया। आज मालपुआ का नाम लेते ही दुनिया भर में सबसे पहले “पुष्कर” याद आता है।

भास्कर समूह का सम्मान—उद्यमिता और धरोहर संरक्षण को सलाम

सम्मान समारोह में भास्कर समूह ने कहा—“गिरिराज वैष्णव ने पारंपरिक मालपुए को ब्रांड पहचान में बदलकर उद्यमिता और सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊँचाइयाँ दी हैं।”

पुष्कर में खुशी की लहर

सम्मान की खबर मिलते ही पुष्कर में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय व्यापारियों, संतों और नागरिकों ने इसे पूरे शहर की सामूहिक उपलब्धि बताते हुए वैष्णव परिवार को बधाइयाँ दीं।

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