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फर्जी दिव्यांगों को होनी चाहिए जेल ,फर्जी प्रमाण पत्रों से मिली नौकरी

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर। प्रदेश में विकलांगता प्रमाण पत्र और विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र जारी करने में फर्जीवाड़ा चल रहा है। जयपुर के एस एम एस अस्पताल की जांच में फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के मामले सामने आए हैं। इतना ही नहीं फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली है।

यह खुलासा सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग मंत्रालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव पंत को लिखे पत्र में बताया कि जांच में पाया गया कि राहुल कसाना और प्रमोद के विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी थे, जिन्हें सीएमएचओ भरतपुर ने जारी किया था। इसी तरह महेन्द्र सिंह नैन का मामला भी सामने आया है, जिसे जोधपुर के सीएमएचओ ने 63 फीसदी श्रवण बाधित होने का प्रमाण पत्र जारी किया था, लेकिन एस एम एस अस्पताल की जांच में पाया गया कि उन्हें कोई श्रवण बाध्यता नहीं थी। इसके अलावा 40 अन्य विकलांगता प्रमाण पत्र सन्देश के दायरे में आये है , जिनकी भी पुनः जांच करने की आवश्यकता है।

केस न.1
प्रमोद
यूडीआइडी संख्या क्रम 0730419890181067, सीएमएचओ भरतपुर ने विकलांगता पत्र जारी किया था, जो जांच में फर्जी पाया गया।

केस 02

राहुल कसाना- यूडीआइडी संख्या 0730020030190150, सीएमएचओ भरतपुर ने विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया था, जो जांच में फर्जी पाया गया।

पुलिस जांच की रफ्तार धीमी –
अग्रवाल ने पत्र में दुःख प्रगट करते हुए बताया कि इन मामलों में पुलिस जांच धीमी गति से चल रही है। ऐसे अधिकारियों और फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जो प्रदेश में विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने की धोखाधड़ी के खेल में शामिल हैं।
कोताही पर कार्यवाही की चेतावनी

पत्र के बाद मुख्य सचिव सुंधाशु पंत ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रबंधन को विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने में कोताही बरतने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। गोरतलब है कि गत दिनों आरपीएससी में नेत्र रोगी विशेषज्ञ के फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए वर्ष 2019 में कनिष्ठ लिपिक की नौकरी हासिल करने का मामला भी सामने आया था।

सजगता बरतने की दी हिदायत –
आनलाइन आवेदन पर पूर्व में सीएमएचओ के जरिए विकलांगता व यूडीआईडी बनाए जा रहे थे। गत दिनों कुछेक केस फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर नौकरी हासिल करने के सामने आये । अब मेडिकल कॉलेज व अस्पताल अधीक्षक स्तर पर दो विशेषज्ञो का बोर्ड गठित करके प्रमाण पत्र बनाने में सजगता बरतने की हिदायत दी गई है।

डा. अरविन्द खरे,
अधीक्षक जेएलएन अस्पताल अजमेर

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