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केन्द्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा पर विधायक पूनियां ने किसानों को एकता के लिए दी बधाई

केन्द्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा पर विधायक पूनियां ने किसानों को एकता के लिए दी बधाई
-नियामत जमाला-
भादरा, / केन्द्र सरकार द्वारा शुक्रवार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष व भादरा क्षेत्र से माकपा विधायक का. बलवान पूनियां ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा है कि किसान आन्दोलन की आगामी रणनीति का फैसला संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी व कोर कमेटी के सदस्य करेंगे, क्योकि केन्द्र सरकार ने इन तीनों कृषि कानूनों को संसद में पारित किया था। मोर्चा व किसान संगठनों के फैसले को जिले में लागू किया जाएगा। इस आन्दोलन के चलते 750 किसानों की शहादत हुई, वहीं पर किसान एक वर्ष से बार्डर पर मजबूती से डटे रहकर आन्दोलन को मजबूत करते रहे। गत एक वर्ष से किसानों के आन्देालन के चलते पूरे बाजार पर प्रभाव पड़ा व किसानों की बाते जनता के दिल तक पहुंची। जिससे किसान आन्दोलन को समर्थन मिला। पूनियां ने कहा कि गत दिनों हुए 27 उपचुनाव में भाजपा की हार के चलते भाजपा को सबक मिला हैं। उन्होंने कहा कि कृषि फसलों को समर्थन मूल्य की गारंटी केन्द्र सरकार दे। किसान अपने हितों के लिए लड़ेगा व जीतेगा। विधायक पूनियां ने कहा किसानों को धर्म व जाति में बांटकर भाजपा ने मनमाने ढंग से कृषि कानून बिल लागू किए। गोदी मीडिया के बाद भी सोशल मीडिया ने किसानों का पक्ष जनता के सामने रखा व हम जीते। उन्होंने कहा किसानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी। नोहर से माकपा नेता मंगेज चौधरी ने कहा कि इस किसान आन्दोलन के चलते किसानों को आंतककारी, खालिस्तानी,अपराधी, आन्दोलन जीवी व दबंगों का आन्दोलन बताते हुए किसानों की प्रतिष्ठा गिराने की कोशिश की गई। किसानों ने फिर भी अपना संघर्ष जारी रखा। जिससे मजबूर होकर केन्द्र सरकार को कृषि के तीनों बिल वापस लेने पड़े। किसानों के इस आन्दोलन की जीत से यह स्पष्ट हो गया है कि देश का किसान एक है उसे बांटा नही जा सकता और भविष्य में भी कोई किसान आन्दोलन होगा तो वह उससे ओर अधिक मजबूत होगा। साहित्यकार व जन कवि विनोद स्वामी ने कहा कि किसानों को अभी भी जनजागरण करने व केन्द्र सरकार की मनमानी नीतियो से अवगत कराने की जरूरत है। 1857 की क्रान्ति के बाद देश को आजाद होने में 90 साल लग गए थे। किसानों को अपने विरूद्ध लागू होने वाले कानूनों के बारे में पूरी समझ होने की आवश्यकता है।
फोटो-विधायक बलवान पूनियां व अन्य पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते

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