अजमेर में प्राइवेट बसों की हड़ताल, मालिक बोले- लोन की किस्तें भी नहीं चुका पा रहे, जोधपुर, कोटा समेत कई रूट के यात्री हुए परेशान
मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर
अजमेर। अजमेर में प्राइवेट बस संचालकों ने हड़ताल कर परिवहन विभाग की ओर से की जा रही चालान की कार्रवाई और नई गाइडलाइन पर गुस्सा जाहिर किया है। जयपुर रोड पर विरोध-प्रदर्शन कर कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार ध्यान नहीं देती, हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल के कारण अजमेर से चलने वाली करीब 100 बसों का संचालन ठप रहा। ऐसे में यात्री भी परेशान हुए।
अजमेर बस यूनियन के सचिव संजय वर्मा ने बताया- जिन बसों को पहले परिवहन विभाग की ओर से फिटनेस और बॉडी स्ट्रक्चर के आधार पर पास किया जा चुका है, उन्हें अब अचानक गलत ठहराकर चालान काटे जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है
बसों की किश्त भी नहीं चुका पा रहे
परिवहन विभाग सीधे लाखों रुपए के चालान काट रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकतर बस संचालकों ने बैंक से लोन लेकर बसें खरीदी हैं।
बसें सीज होने पर न तो बैंक की किश्त चुकाई जा सकती हैं और न ही ड्राइवर व कंडक्टर को समय पर भुगतान हो पाता है।
इसके अलावा इंश्योरेंस, टैक्स और फिटनेस जैसे अनिवार्य खर्च भी लगातार बने रहते हैं। ऐसे में परेशानी बढ़ गई है। जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक निजी बसों की हड़ताल जारी रहेगी।
वहीं दूसरी ओर अजमेर से दिल्ली, हरिद्वार, सूरत, नागौर, जोधपुर, कोटा सहित अन्य जगहों पर जाने वाली करीब 100 बसों का संचालन ठप रहने से यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ी।
ये है प्रमुख मांगे..
जिन बसों को पूर्व में परिवहन विभाग द्वारा फिटनेस व बॉडी स्ट्रक्चर के आधार पर पास किया जा चुका है, उन्हें चलने की अनुमति दी जाए।
यदि पास की गई किसी बस में वर्तमान गाइडलाइन के अनुसार कोई कमी पाई जाती है तो उसकी लिखित जानकारी बस संचालकों को दी जाए। बसों में बताई गई कमियों को सुधारने के लिए बस संचालकों को उचित समय और मौका दिया जाए। सुधार नहीं होतो ही कार्रवाई हो। बिना पूर्व सूचना के लाखों रुपए के चालान बनाकर बस संचालकों को आर्थिक रूप से परेशान करना बंद किया जाए। बसें सीज करने की कार्रवाई रोकी जाए, क्योंकि इससे बैंक की किस्त, इंश्योरेंस, टैक्स और फिटनेस शुल्क का भुगतान संभव नहीं हो पाता।
निजी बसों में यात्रियों के समान सामान रखने के लिए हर बस में एक अलग और सुरक्षित लगेज डिक्की को अनिवार्य माना जाए। नई बसों में लागू नई गाइडलाइन के तहत लगाए गए सुरक्षा इंतजामों को मान्यता दी जाए। हर बस में प्रत्येक यात्री सीट के पास कांच तोड़ने का हथौड़ा, दो इमरजेंसी गेट, दो मुख्य गेट, अग्निशमन यंत्र, मेडिकल किट और दो वेंटिलेशन की व्यवस्था को पर्याप्त माना जाए।


