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ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दे दिया 10 हजार करोड़ का टेंडर, राजस्थान में स्मार्ट मीटर योजना में ताक पर रखे नियम , ऊर्जा मंत्री बोले – यह फैसला पिछली सरकार का

मुकेश वैष्णव/दिव्यांग जगत/अजमेर

अजमेर। जो कंपनी (मैसर्स जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) गोवा में ब्लैक लिस्ट है, उसी कंपनी को राजस्थान सरकार ने टेंडर दे दिया। टेंडर भी दो-चार करोड़ का नहीं, बल्कि 10 हजार करोड़ से ज्यादा का। लापरवाही के कारण ब्लैक लिस्ट होने के 23 दिन बाद ही मैसर्स जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को राजस्थान में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की जिम्मेदारी मिल गई। चौंकाने वाली बात यह है कि करीब डेढ़ करोड़ उपभोक्ताओं के मीटर लगाने के लिए प्रदेश के तीनों बड़े डिस्कॉम- जयपुर, अजमेर और जोधपुर वितरण निगम लिमिटेड ने एक ही कंपनी को टेंडर दिया उधर, ऊर्जा मंत्री से सवाल किए तो उन्होंने साफ कहा कि कंपनी के ब्लैक लिस्ट होने की जानकारी विभाग को नहीं है। पिछली (कांग्रेस) सरकार ने टेंडर की प्रक्रिया शुरू की थी।
पिछले साल अगस्त में गोवा में ब्लैक लिस्ट किया गया।
पड़ताल में सामने आया कि 5 अगस्त 2024 को गोवा सरकार के ऊर्जा विभाग के चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर स्टीफन फर्नांडिस के हस्ताक्षर से मैसर्स जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. और मैसर्स एचपीएल इलेक्ट्रिक एंड पावर लिमिटेड को ब्लैक लिस्ट करने का आदेश जारी किया गया था। इसके ठीक 23 दिन बाद आनन-फानन में अजमेर डिस्कॉम ने मैसर्स जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को 1269 करोड़ 56 लाख के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए। इसके बाद जयपुर डिस्कॉम ने 3121.42 करोड़ रुपए से ज्यादा का स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका दे दिया । इसी तरह जोधपुर डिस्कॉम ने भी मैसर्स जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को हजारों करोड़ के 3 टेंडर जारी किए गए । टेंडर की कुल राशि 10 हजार करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।

खुद बिजली कंपनी ने की नियमों की अवहेलना
अजमेर डिस्कॉम ने टेंडर 27 अगस्त 2024 को जारी किया। टेंडर की शर्तों में 18 वें पॉइंट में लिखा है कि जीनस पावर किसी भी ऐसे कॉन्ट्रेक्टर की मदद टेंडर का कार्य पूरा करने में नहीं लेगी जो टेंडर से पहले किसी भी जगह ब्लैक लिस्टेड हो जबकि खुद अजमेर डिस्कॉम ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी को पूरे 1269 करोड़ से ज्यादा का ठेका दे डाला।
राजस्थान सरकार के टेंडर नियमों में साफ अंकित है कि ब्लैक लिस्ट फर्म को टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता। यहां तो प्रक्रिया के बाद टेंडर ही दे दिया गया।
इसके लिए राजस्थान में ‘सार्वजनिक क्रय में पारदर्शिता अधिनियम, 2012’ (Rajasthan Transparency in Public Procurement Act, 2012) बनाया गया है, जिसके तहत किसी भी विभाग या राजकीय उपक्रम में सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं के नियम उल्ल्घंन करने पर फर्म को ब्लैक लिस्ट किया जाता है और ब्लैक लिस्ट फर्म किसी भी प्रकार की टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकती हैं।
टेंडर की शर्त में साफ लिखा है कि ब्लैकलिस्ट या बैन हो चुकी कंपनी काम नहीं कर सकती।

कंपनी प्रतिनिधि बोले- गलतफहमी हो गई थी
यह टेंडर मैसर्स जीनस पावर के प्रदीप शर्मा के नाम पर जारी किए गए थे। प्रदीप शर्मा से गोवा में कंपनी के ब्लैक लिस्ट होने के बाद भी राजस्थान में टेंडर लेने पर सवाल पूछा उन्होंने दावा किया कि गोवा के अफसरों को गलतफहमी हो गई थी, हमारे पास कोर्ट का एक आदेश है, जिसके बाद हमें ब्लैक लिस्ट से हटा दिया।
कंपनी प्रतिनिधि से कोर्ट आदेश की प्रति मांगी, कौन सा कोर्ट है जानकारी मांगी तो शर्मा ने कहा कि उनके मीडिया टीम के लोग संपर्क करेंगे । दो दिन बीतने के बाद भी कंपनी की ओर से किसी तरह का कोई दस्तावेज नहीं दिया गया । पड़ताल में सामने आया कि गोवा के ऊर्जा विभाग के रिकॉर्ड में अभी भी कंपनी ब्लैक लिस्ट की सूची में ही शामिल है।

3 कारणों से किया गया था कंपनी को ब्लैकलिस्ट

गोवा सरकार के ऊर्जा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, M/s Genus Power Infrastructure Limited और M/s HPL Electric & Power Limited को स्मार्ट मीटर के कामकाज की तकनीकी या गुणवत्ता संबंधी शिकायतें, जैसे- खराब मीटर या गलत माप, एग्रीमेंट उल्लंघन, जैसे डिलीवरी में देरी या नियमों का पालन न करना आदि के चलते सरकार के आदेश पर ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई की गई।
ऊर्जा मीटरों में तकनीकी खराबी या गलत माप की शिकायतें
अनुबंध की शर्त के अनुसार तय समय पर डिलीवरी नहीं देना
कितने मीटर लगाए गए, इसका फॉल्स डेटा देना
राजस्थान में भी वही लापरवाहियां
जिन कारणों से कंपनी को गोवा में ब्लैकलिस्ट किया गया था वैसा ही रवैया यहां भी सामने आ रहा है राजस्थान में कंपनी का कामकाज शुरुआत से ही सुस्त है साथ ही स्मार्ट मीटर की बिलिंग से जुड़ी शिकायतें भी आ रही हैं । राजस्थान में भी काम की धीमी गति पर कंपनी को पहला नोटिस दिया है। एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार कंपनी को एक साल में 18 लाख स्मार्ट मीटर लगाने थे। अभी तक केवल 4.25 लाख ही लगाए गए हैं।

राजस्थान में कछुए की चाल से चल रहा स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट
प्रदेश में कुल 1 करोड़ 42 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं । इनमें जयपुर डिस्कॉम में 47.63 लाख उपभोक्ताओं के मुकाबले 2.13 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं। अजमेर डिस्कॉम में 54.32 लाख उपभोक्ताओं के मुकाबले 1.57 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं। इसके बाद जोधपुर डिस्कॉम में 40.80 लाख उपभोक्ताओं के मुकाबले केवल 55 हजार उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं , यानि राजस्थान में तीनों डिस्कॉम में केवल 4.25 लाख स्मार्ट मीटर ही लगाए गए हैं। अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने इस तरह के 3 वर्क ऑर्डर जारी किए थे, जिसके एक वर्क ऑर्डर की कीमत ही 1269 करोड़ है
अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने इस तरह के 3 वर्क ऑर्डर जारी किए थे, जिसके एक वर्क ऑर्डर की कीमत ही 1269 करोड़ है

ऊर्जा मंत्री बोले- पिछली सरकार की गलती

टेंडर से जुड़े सवाल के जवाब में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा- पिछली सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका देने की प्रक्रिया शुरू की थी। हमारी सरकार ने केवल बची हुई औपचारिकताओं को पूरा करके कार्य आदेश दिए थे । मंत्री ने स्वीकार किया कि कंपनी का कामकाज संतोषप्रद नहीं है।
कंपनी शर्तों के अनुसार राज्य में काम नहीं कर पा रही है। ऐसे में हमने 8 जुलाई को नोटिस भी दिया है। तीन महीने में स्मार्ट मीटर लगाने के टारगेट पूरा करने को कहा है, अन्यथा कंपनी को राजस्थान में भी ब्लैक लिस्ट करने और टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई होगी।

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